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900 करोड़ के हिरेको पेपरवेट बनाकर इस्तेमाल करनेवाले निज़ाम के संपत्तिकी अद्भुत कहानी

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900 करोड़ के हिरेको पेपरवेट बनाकर इस्तेमाल करनेवाले, हैदराबाद के सातवे निज़ाम मीर उस्मान अली खान का नाम इनदिनों चर्चा में है, वजह है उनके 300 करोड़ रपये जो उन्होंने उस्वक़्त ब्रिटेन की एक बैंक में जमा करवाए थे, लेकिन आपको बतादे की यह 300 करोड़ रूपए उनकी संपत्ति के आगे ऐसे है जैसे ऊंट में मुँह में ज़ीरा।

एक रिपोर्ट के अनुसार कहाजाता है की निजाम के पास करीब 230 अरब की संपत्ति थी, और उसवक़्त वह केवल भारत नहीं बलकी दुनिया के सबसे आमिर व्यक्ति थे।

उनदिनों अपने वक़्त के सबसे आमिर समझेजानेवाले मीर उस्मान की संपत्ति का अंदाजा महज इसबात से लगाया जा सकता है की वह 900 करोड़ के हिरेको पेपरवेट बनाकर इस्तेमाल करते थे, आज हम आपको बताएंगे उनके अमीरिके अद्भुत किस्से।

900 करोड़ के हिरेको पेपरवेट बनाकर इस्तेमाल करनेवाले निज़ाम

900 करोड़ के हिरेको पेपरवेट बनाकर इस्तेमाल करनेवाले निज़ाम की दौलत

निजाम उस्मान अली खान का जन्म 6 अप्रेल 1886 में हुआ था, वह हैदराबाद के आखरी निज़ाम थे उन्होंने हैदराबाद के संस्थान पर 1911 से 1948 तक शाशन किया।

चूहोने कतरलिए थे निज़ाम के 90 लाख पौंड

कहते है की निज़ाम के पास इतनी संपत्ति थी की उनकेलिए इसका संरक्षण करना एक कठिन काम था, सूत्रों के हवालेसे यह कहाजाता है की, एक बार निजाम के तहखाने में रखे करीब 90 लाख पौंड के नोट चूहोने कतरलिए थे, सेलिब्रिटी नेटवर्थ नामक एक वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार निजाम के वैयक्तिक इस्तेमाल में करीब 100 दशलक्ष के जवाहरात थे तो वही उनकी कुल संपत्ति में करीब 400 दशलक्ष के महज जवाहरात थे।

और इसी जवाहरात में केवल 900 करोड़ का जैकब हिरा भी शामिलथा, आइये आपको बताते है इस हिरे से जुडी कहानी

900 करोड़ के हिरे (जेकब डायमंड) की कहानी

ऐसा कहाजता है की हैदराबाद के छटे निजाम मेहबूब अली खान पाशा ने, जेकब नाम के एक हीरो के व्यापारी से यह हिरा खरीदाथा, और इसीलिए इस हिरे का नाम जेकब डायमंड रखा गया था, कहते है की यह हीरा आकर में शतुरमुर्ग के अंडे जितना बड़ा था।

जैकब डायमंड के आजके तारीख में कीमत करीब 900 करोड़ रुपये है, और इसवक्त यह हिरा भारत सरकार के ख़जानेमे है, लेकिन आपको बतादे की निजाम इस 900 करोड़ के हिरेको पेपरवेट बनाकर इस्तेमाल करते थे।

इस हिरेको इम्पीरिअल या ग्रेट व्हाईट या विक्टोरिआ नामसभी जाना जाता है, यह हिरा साऊथ अफ्रीका के किम्बर्ली खानदान से निकला गया है, तराशनेसे पहले इसका वजन करीब 457.5 कैरेट था, कहते है निज़ाम अपने राज्य को लेकर काफी चिंतित रहते थे।

निज़ाम के महल में थी ख़ज़ानोंसे भरी कई लौरिया

कहते है की निजाम के महल में खजाने से भरी कई लौरिया खड़ी रहतीथी, जिनमे जवाहरात और सोने की ईटे रखी रहती थी, और इन की रक्षा के लिए महल में करीब एक हज़ार कर्मचारी तैनात रहते थे

भारत अंग्रेज़ो द्वारा आज़ाद होनेके बाद सारे संस्थानों को इसमें विलीन करदिया गया, जिसमे हैदराबाद का संस्थान भी शामिलथा, निजाम की सारी संपत्ति को सरकार ने अपने कब्जेमें लेलिया, निजाम के जवाहरात आजभी भारत सरकार ने म्युजीएम में रखे है

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सामाजिक कामोमे निजाम का सहयोग

हैदराबाद शहर में आजभी इस्तेमाल किये जानेवाली कई सरकारी इमारते जिसमे हैद्राबाद हाय कोर्ट, उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल, स्टेट सेन्ट्रल लाइब्रेरी, असेंब्ली हॉल, जुबली हॉल, स्टेट म्यूज़ियम, निजामिया ऑब्ज़र्वेटरी, जैसी कई इमारते शामिल है यह सब इमारते निजाम उस्मान अली खान के कार्य काल में बनवाई गई है।

इतनी दौलत होकर भी निजाम पहनता था फटाहुआ कुर्ता

कहते है की इतनी बेशुमार दौलत होने के बावजूद, निजाम उस्मान अली खान का मन पैसो से उकता गया था, उनके जीवन वक़्त ऐसा आया की उन्होंने सारे ऐशो आराम छोड़ दिए, कहते है की उनकी अलमारी अनगिनत नए, कपडोसे भरी रहती थी, मगर वह अपने हाथसे बने मोज़े और कुर्ते पहनते।

कई बार तो वह उन्ही फटे कुरतोंको बदल कर पहनते, यहातक की वह एक साधारण से कमरेमे एक चटाई पर सोया करते थे।

निजाम कई शैक्षणिक एवं धार्मिक संस्थाओको दान दिया जिनमे बनारस विश्व विद्यलय से लेकर कई मंदिर तक शामिल थे, ऐसा भी कहाजाता है की निजाम ने भारत सरकार के सुरक्षा विभाग को करीब 5 टन सोना दान दिया था जो अबतक का सबसे बड़ा दान भी कहा जाता है।

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Aasim Shaikh

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